शिलाजीत के फायदे और नुकसान | 13 Amazing Benefits of Shilajit.

हैलो दोस्तों , आयुर्वेद और साहित्य ब्लॉग में आज हम सर्वरोग नाशक शिलाजीत के फायदे और नुकसान से सम्बन्धित जानकारी शेयर कर रहे हैं . आचार्य चरक के अनुसार ऐसा कोई साध्य रोग नहीं है जिसका शिलाजीत द्वारा उपचार नहीं किया जा सकता . अनुपम औषधि शिलाजीत के फायदे जानने के लिए पढ़ते रहिये .

शिलाजीत के फायदे और नुकसान

Table of Contents

शिलाजीत क्या है ?

शिलाजीत पर्वतों से निकलने वाला एक स्राव है जो मिट्टी जैसे रंग का तथा गूगल की तरह दिखने वाला होता है . शिलाजीत में गोमूत्र जैसी गंध पायी जाती है . पर्वतों से प्राप्त होने के कारण शिलाजीत में कंकड़ , मिट्टी आदि की मिलावट होती है इसलिए इसे सदा शुद्ध करके ही सेवन करना चाहिए .

शुद्ध शिलाजीत की पहचान

बाजार में उपलब्ध होने वाला शिलाजीत अशुद्ध हो सकता है इसलिए इसकी शुद्धता की पहचान करने के लिए निम्नानुसार परीक्षा की जा सकती है .

  • शुद्ध शिलाजीत में गोमूत्र जैसी गंध आती है .
  • शुद्ध शिलाजीत को पानी में डालने पर पानी में घुलकर सूक्ष्म तंतु छोड़ता है .
  • शुद्ध शिलाजीत को आग में जलाने पर धुंआ रहित जलता है और अवशेष लिंगाकार हो जाता है .

शिलाजीत के फायदे और नुकसान

आयुर्वेद में शिलाजीत को सर्वरोग नाशक कहा गया है . आचार्य चरक ने सभी साध्य रोगों को शिलाजीत के सेवन से नष्ट होने वाला कहा है . आइये जानते हैं आयुर्वेद की अनुपम औषधि शिलाजीत के फायदे और नुकसान क्या हैं .

शिलाजीत के फायदे

शिलाजीत को ज़रा व्याधि नाशक , मेदोहर , श्वास कास हर , शोथहर , प्रमेह नाशक आदि कहा गया है . शिलाजीत के फायदे निम्न रोगों में प्राप्त होते हैं .

शिलाजीत के फायदे

पेशाब की रुकावट में शिलाजीत से लाभ

मूत्रावरोध ( पेशाब की रुकावट ) में गोखरु के काढ़े के साथ शिलाजीत का सेवन करने से लाभ होता है .

डायबिटीज में शिलाजीत का उपयोग

मधुमेह ( डायबिटीज ) रोगियों द्वारा शिलाजीत का सेवन करने से लाभ होता है तथा ब्लड शुगर का स्तर सामान्य रखने में मदद मिलती है . ( यह भी पढ़ें – डायबिटीज के लक्षण और उपाय )

मोटापा कम करने में शिलाजीत का प्रयोग

शहद के साथ शिलाजीत का सेवन करने से मोटापा एवं वजन कम करने में सहायता मिलती है . ( यह भी पढ़ें – महिलाओं का मोटापा कम करने के उपाय )

शिलाजीत से रक्तपित्त में लाभ

रक्तपित्त ( नाक , मुंह आदि से खून निकलना ) में मुलेठी के काढ़े के साथ शिलाजीत का सेवन करने से लाभ होता है .

एनीमिया में शिलाजीत के फायदे

एनीमिया ( खून की कमी ) होने पर शिलाजीत को लौह भस्म के साथ सेवन करने से लाभ होता है तथा खून की वृद्धि होती है .

व्रण में शिलाजीत का उपयोग

व्रण या घाव होने पर शिलाजीत को कपूर के साथ सूखा पीस कर घाव में लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है .

यौन रोगों में पुरुषों के लिए शिलाजीत के फायदे

पुरुषों द्वारा शिलाजीत का सेवन करने यौन क्षमता में वृद्धि , शुक्राणुओं में वृद्धि , कामेच्छा ( यौन उत्तेजना ) में वृद्धि और स्तम्भन शक्ति में वृद्धि होती है . पुरुषों के लिए शिलाजीत को सर्वश्रेष्ठ टॉनिक माना जाता है .

पीलिया में शिलाजीत के लाभ

पांडु ( पीलिया ) रोग में शिलाजीत को त्रिफला चूर्ण और लौह भस्म के साथ सेवन करने से रोगी को लाभ होता है .

शिलाजीत से शारीरिक कमजोरी में फायदा

शारीरिक कमजोरी होने पर शिलाजीत को दूध और मिश्री के साथ सेवन करने से कमजोरी नष्ट होती है तथा शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है . ( यह भी पढ़ें – कमजोरी और थकान दूर करने के उपाय )

लकवा में शिलाजीत का उपयोग

लकवा ( पैरालायसिस ) के रोगी को शिलाजीत और अनंतमूल ( सारिवा ) का सेवन कराने से लाभ होता है .

हाई ब्लड प्रेशर में शिलाजीत से लाभ

उच्च रक्तचाप ( हाई बी पी ) में सारिवा और मुलैठी क्वाथ के साथ शिलाजीत का सेवन कराने से रोगी को लाभ होता है . ( यह भी पढ़ें – हाई ब्लड प्रेशर में क्या नहीं खाना चाहिए )

धातु रोग एवं स्वप्नदोष में शिलाजीत के लाभ

पेशाब के साथ धातु निकलना ( शुक्रमेह ) तथा रात्रि को नींद में स्वतः वीर्य स्खलन होना ( स्वप्नदोष ) में शिलाजीत और वंग भस्म का प्रयोग करने से रोगी को लाभ होता है .

सूजन में शिलाजीत का लाभ

शरीर में कहीं भी सूजन होने पर शिलाजीत को गोमूत्र के साथ सेवन करने से सूजन में कमी होती है .

शिलाजीत के नुकसान

शिलाजीत एक अद्भुत और गुणकारी औषधि है जिसका आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा विभिन्न रोगों के उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है किन्तु अशुद्ध या अमात्रा में शिलाजीत का सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है . शिलाजीत का प्रयोग हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर के निर्देशानुसार ही करना चाहिए . आइये जानते हैं शिलाजीत के नुकसान क्या हो सकते हैं .

  • शिलाजीत के अधिक सेवन से चक्कर आना , बी पी लो हो जाना जैसी समस्या हो सकती है .
  • शिलाजीत के अधिक सेवन से प्रतिक्रया स्वरुप चर्म विकार फोड़े , फुंसी निकलना आदि हो सकते हैं .
  • गर्भवती महिलाओं को शिलाजीत के सेवन से बचना चाहिये अथवा अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए .

शिलाजीत खाने के बाद क्या क्या नहीं खाना चाहिए ?

शिलाजीत एक आयुर्वेदिक औषधि है इसलिए इसका सेवन हमेशा आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देशानुसार ही करना चाहिए . सामान्यतः शिलाजीत का सेवन करते समय निम्नलिखित चीजों का परहेज रखना चाहिए .

शिलाजीत खाने के बाद क्या क्या नहीं खाना चाहिए
  • भारी भोजन नहीं करना चाहिए .
  • तेल का सेवन नहीं करना चाहिए .
  • खटाई का सेवन नहीं करना चाहिए .
  • शराब का सेवन नहीं करना चाहिए .
  • मांस , मछली का सेवन नहीं करना चाहिए .
  • कुलथी का सेवन नहीं करना चाहिए .

शिलाजीत सेवन विधि

शिलाजीत का सेवन आयुर्वेदिक डॉक्टर के निर्देशानुसार करना चाहिए . सामान्यतः शिलाजीत की सेवन विधि निम्नानुसार है .

मात्रा – 250- 500 mg ( वयस्क )

अनुपान – दूध , औषध युक्त क्वाथ ( रोगानुसार )

FAQ

प्रश्न – शिलाजीत किसे नहीं खाना चाहिए ?

उत्तर – आयुर्वेद अनुसार पित्त प्रकृति वालों को तथा जिनकी आँखें लाल रहती हों ऐसे लोगों को शिलाजीत का सेवन नहीं करना चाहिए .

प्रश्न – शिलाजीत कौनसी बीमारी में काम आता है ?

उत्तर – मूत्रावरोध , शुक्रमेह , स्वप्नदोष , नपुंसकता , शारीरिक कमजोरी आदि रोगों में शिलाजीत का प्रयोग किया जाता है .

प्रश्न – शिलाजीत लेते समय किन बातों से बचना चाहिए ?

उत्तर – शिलाजीत लेते समय रात्रि जागरण , भारी भोजन , तेल , खटाई , मांस , मछली , शराब आदि के सेवन से बचना चाहिए .

प्रश्न – क्या शिलाजीत बी पी बढ़ा सकता है ?

उत्तर – शिलाजीत में ब्लड प्रेशर कम करने के गुण पाए जाते हैं . शिलाजीत के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर कम होने की समस्या हो सकती है .

दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने आयुर्वेद की सर्वरोग नाशक अनुपम औषधि शिलाजीत के फायदे और नुकसान से सम्बन्धित जानकारी पेश की . आशा है यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी . अगले लेख में अन्य किसी उपयोगी और रोचक जानकारी के साथ हाजिर होंगे .

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